उद्गीथ प्राणायाम


प्रक्रिया : सुखासन,सिद्धासन,पद्मासन,वज्रासन में बैठें। लंबी सांस धीरे से लें, और ओउम का जाप करें । सांस को अन्दर और बाहर छोडने की प्रक्रिया लम्बी, धीरे व सूक्ष्म होनी चाहिए । अभ्यास के साथ श्वास अवधी को एक मिनट लम्बाअ करें ।श्वास को शरीर के अन्दर प्रवेश करते हुए महसूस करें ।
अवधि : 10 मिनट या अधिक

भ : अनिन्द्रा (insomnia) के लिए बहुत उपयोगी है । बुरे स्वपन से निजात पाने और गहरी नींद के लिए लाभदायक । मन को एकाग्र करने व योगनिन्द्रा के अभयास के लिए भी लाभदायक


उद्गीथ प्राणायाम - विस्त्रित जानकारी

उद्गीथ प्राणायाम को ओमकारी जाप अर्थात ॐ के जाप से भी जाना जाता है । उद्गीथ का अर्थ होता है ऊचें स्वर मे गाना । ॐ ("ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽमऽऽऽऽ") का जाप करते समय "ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ" को "मऽऽऽऽ" से तीन बार अधिक लम्बा होना चाहिए। ।
अवधी :    कम से कम तीन बार, अधिकतम जब तक कर सकते हो ।

विधि:   सुखासन,सिद्धासन,पद्मासन,वज्रासन में बैठें। लंबी सांस धीरे से लें, और ओउम का जाप करें । सांस को अन्दर और बाहर छोडने की प्रक्रिया लम्बी, धीरे व सूक्ष्म होनी चाहिए । अभ्यास के साथ श्वास अवधी को एक मिनट लम्बाअ करें । श्वास को शरीर के अन्दर प्रवेश करते हुए महसूस करें । आरम्भिक अवस्था मे साधक श्वांस को केवल नाक में ही महसूस करेगा और अभ्यास के साथ सा।स को शरीर के अन्दर भी महसूस किया जा सकता है ।
लाभ : 

  • अनिन्द्रा (insomnia) के लिए बहुत उपयोगी है ।
  • बुरे स्वपन से निजात पाने और गहरी नींद के लिए लाभदायक ।
  • मन को एकाग्र करने व योगनिन्द्रा के अभयास के लिए भी लाभदायक
  • पॉझीटीव्ह एनर्जी तैयार करता है|
  • सायकीक पेंशनट्स को फायदा होता है|
  • मायग्रेन पेन, डीप्रेशन,ऑर मस्तिषक के सम्बधित सभि व्यधिओको मीटा ने के लिये|
  • मन और मस्तिषक की शांती मीलती है|
  • ब्रम्हानंद की प्राप्ती करने के लीये|
  • मन और मस्तिषक की एकाग्रता बढाने के लिये|

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