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मनुष्य एक सात-मंजिला मकान है — ओशो का दृष्टिकोण

सात मंज़िलों का मनुष्य: प्रमाद से जागरण तक

परिचय: ओशो का अमूल्य प्रवचन

इस ब्लॉग में आप ओशो {Osho} के उस गहरे प्रवचन को पढ़ेंगे और सुनेंगे, जिसे हमने यहाँ आपके लिए {audio discourse} के रूप में भी उपलब्ध कराया है। ओशो बताते हैं कि मनुष्य केवल वही नहीं है जो सतह पर दिखता है, बल्कि एक सात मंजिला मकान की तरह है। हम सामान्यतः सिर्फ पहली मंजिल — {Conscious Mind} — में रहते हैं और बाकी मंजिलों से अनजान रहते हैं। यही कारण है कि हमारा जीवन अधूरा और अपूर्ण लगता है। आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य केवल ऊपर उठना नहीं है, बल्कि भीतर की गहराई में उतरकर नीचे और ऊपर दोनों का अनुभव करना है। ओशो हमें यही राह दिखाते हैं — कि नीचे की गहराई जितनी बढ़ेगी, ऊपर की ऊँचाई उतनी ही बढ़ेगी।

सात मंजिलों की पूरी संरचना

  • पहली मंजिल — चेतन {Conscious Mind}: यह सतह है जहाँ हम अपने आप को जाग्रत समझते हैं।
  • दूसरी मंजिल — अचेतन {Unconscious Mind}: दबे हुए विचारों और इच्छाओं का क्षेत्र।
  • तीसरी मंजिल — सामूहिक अचेतन {Collective Unconscious}: मानवता की साझा स्मृतियाँ और संस्कार।
  • चौथी मंजिल — ब्रह्म-अचेतन {Cosmic Unconscious}: प्रकृति और ब्रह्मांड की गहरी धड़कन।
  • पाँचवीं मंजिल — अतिचेतन {Superconscious}: प्रेम, ध्यान और सृजनात्मकता का उद्गम।
  • छठी मंजिल — सामूहिक चेतन {Collective Conscious}: साझा जागरण का अनुभव।
  • सातवीं मंजिल — ब्रह्म-चेतन {Cosmic Conscious}: अनंत प्रकाश और अंतिम लक्ष्य।

प्रमाद {Unconscious Living} — हमारी सबसे बड़ी बाधा

इंसान अपनी ज़िंदगी का अधिकांश हिस्सा प्रमाद में बिताता है। प्रमाद का अर्थ है सोये हुए जीना, बिना जागरूकता के जीना। जब आप गुस्से में कोई बात कहकर पछताते हैं, जब आप आदतों में बह जाते हैं और फिर दुखी होते हैं — तो यह सब प्रमाद का परिणाम है।

जागरण की पहली सीढ़ी — होश {Awareness}

ओशो कहते हैं कि पहला कदम है छोटी-छोटी क्रियाओं में जागना।
  • {Mindful Walking} — चलते समय अपने कदमों पर ध्यान देना।
  • {Mindful Eating} — खाते समय हर निवाले को महसूस करना।
  • {Mindful Speech} — बोलते समय शब्द और भाव को जानना।
  • कपड़े पहनते समय जागरूकता लाना।
यही छोटी क्रियाएँ आगे गहरी साधना का द्वार खोलती हैं।

कैसे गहराई में उतरें — व्यावहारिक उपाय

  1. स्मरण {Self-Remembering}: दिनभर खुद को बार-बार याद दिलाना।
  2. अभिनय तकनीक {Acting Technique}: भावनाओं का अभिनय करके उन्हें भीतर से देखना।
  3. स्वप्न जागरण {Lucid Dreaming}: दिन की जागरूकता को सपनों तक ले जाना।
  4. धीरे-धीरे गहराई: चेतन → अचेतन → सामूहिक अचेतन → ब्रह्म-अचेतन तक जाना।

नीचे उतरना = ऊपर उठना

ओशो का संदेश स्पष्ट है — “जितना गहरा उतरोगे, उतना ऊँचा उठोगे।” यह यात्रा केवल ऊपर की नहीं, बल्कि नीचे की भी है। वृक्ष तभी ऊँचाई छूता है जब उसकी जड़ें पाताल तक जाती हैं।

धर्म और विवेक {Conscious Conduct}

महावीर और बुद्ध का सार यही था — हर क्रिया विवेक से करो। जब बैठो तो होश में बैठो, जब चलो तो जागरूक होकर चलो। यही असली धर्म है।

अनुमान से अनुभव तक — योग का मार्ग

फ्रायड ने {Unconscious} के बारे में कहा, जुंग ने {Collective Unconscious} बताया — लेकिन ओशो कहते हैं, यह सब अनुमान है। असली क्रांति तब होती है जब अनुमान अनुभव में बदलता है। योग यही अनुभव कराता है।

अंतिम संदेश

ओशो के अनुसार अप्रमाद {Awareness} ही साधना का सार है। जब सातों मंजिलें अनुभव में आ जाती हैं, तो भीतर कोई विभाजन नहीं रहता। तब केवल एक ही चेतना बचती है — ब्रह्म चेतना। वही समाधि है, वही मोक्ष है, वही असली घर वापसी है।

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