मन की चंचलता रोकना ही योग है
| मन की चंचलता रोकना ही योग है | |||||||
महर्षि पतंजलि को पहला ऐसा शख्स माना जाता है, जिसने योग को गुफाओं और कंदराओं से निकालकर आम आदमी के लायक बना दिया। वेदों और उपनिषदों के बाद योग की पहली किताब पतंजलि ने ही लिखी। उनके मुताबिक योग सिर्फ आसन और प्राणायाम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई और भी अंग हैं। उन्होंने योग दर्शन को चार भागों में बांटा - समाधिपाद, साधनापाद, विभूतिपाद और कैवल्यपाद। पतंजलि योगसूत्र में योग के 196 ऐसे सिद्धांत हैं जिनसे जिंदगी के हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल की जा सकती है। | |||||||
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